अधूरा मकान

हरीशचंद्र पांडेहरीशचंद्र पांडे28 Sept 1952

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इसे दो कमरे का मकान बनना था

फ़िलहाल एक कमरे के बाद काम बंद है

जो कमरा अभी बनना है वह नक़्शे के हिसाब से बड़ा कमरा है

जहाँ पर इस कमरे का दरवाज़ा होना था

वहाँ अभी पपीते का एक पेड़ बड़ा हो रहा है

जब फल लगेंगे इस पेड़ पर तो याद दिलाएँगे हमें

इतना समय बीत गया और हम कुछ नहीं कर पाए

भविष्य का यह कमरा अभी बिखरा है अपने चारों ओर

रेत है एक कोने पर और इसे हवा से बचाया जाना है

एक कोने पर सरिया है इसे पानी से बचाया जाना है

ईंटें बिखरी हुईं इधर-उधर और कुछ बने दरवाज़े भी

ये बरसों से जमा अपनी पहली तारीख़ें हैं

बहने या जंग लगने से इन्हें बचाया जाना है

जो कमरा बना है वह भी पूरी तरह बना नहीं है अभी

दीवारों का रिसाव

पहली बरसात में ही बना गई हैं अनींद का ताल

प्लास्टर से ईंटों का शरीर नहीं ढका जा सका है

हाँ इस बीच

सरिया का एक सिरा धँस गया है बच्चे के पैर में

इस बीच बालों का रंग कुछ धूसर हो गया है

इस बीच कुछ ऐसा बरता जा रहा है कि धोतियाँ अनंत समय

तक चलें

इस बीच अन्न परमात्मा हो गया है

और प्यार इस बीच

खूँटी की तरह दो लाल ईंटों के बीच जगह तलाश रहा है

अधूरा मकान यह

आधा सच है, आधा सपना

आधा हँसी है, आधा रोना

यह ताज़ा कटे बकरे की छटपटाती देह है

एक कामना है जो मरते आदमी को मरने भी नहीं देती

बाहर अपने हरेपन के साथ सूख गईं पत्तियों का बंदनवार है

जिसके भीतर सब कुछ शुभ है, सब कुछ निष्ट

जैसे भीतर कोई युवा फेफड़ा धड़क रहा है

जैसे एक पक्षी विपरीत हवा में तैर रहा है

जैसे एक हँसी वर्तमान और भविष्य की खिड़कियों से छनकर

दूर तक जा रही है

मकान के अधूरेपन से एक ख़ुशबू आ रही है

एक खुरदरी ऊँचाई को लाँघ गई है लौकी की एक बेल

और छा गई है अधूरेपन के ऊपर

हरे सपनों की झालर लिए यह मकान

इस बस्ती का सबसे ख़ूबसूरत मकान है

इस घर का सबसे छोटा बच्चा अपनी कॉपी में

एक पूरा मकान बना रहा है

इस मकान में उसने कुछ पंख लगा दिए हैं

हरीशचंद्र पांडे
About the poet

हरीशचंद्र पांडे

नवें दशक में सामने आए हिंदी के महत्त्वपूर्ण कवि। अपने काव्य-विषयों, धैर्य और सादगी के लिए उल्लेखनीय मूल नाम : हरीशचंद्र पांडे जन्म : अल्मोड़ा, उत्तराखंड हरीशचंद्र पांडे का जन्म उत्तराखंड से अल्मोड़ा में 28 दिसंबर 1952 को हुआ। अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ से स्कूली शिक…

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