जितना रौशन हूँ
उतना ही गोपन
जितना तृप्त हूँ
उतना ही भूखा
जितनी हुई यात्रा
उतनी ही शेष
जितना दूर हूँ
उतना ही समीप
जितना है प्यार
उतना ही इंकार
जितना रौशन हूँ
उतना ही गोपन
जितना तृप्त हूँ
उतना ही भूखा
जितनी हुई यात्रा
उतनी ही शेष
जितना दूर हूँ
उतना ही समीप
जितना है प्यार
उतना ही इंकार

सचमुच इतनी ऊँची इमारतें हैं किदेखने वाले की टोपी गिरने का क़िस्सा
दुनिया की सबसे सुरीली आवाज़जो तुम्हें सुनाई दे रही है
वाह रेडियो! तुम तो सचमुचबड़े ग़ज़ब के निकले यार
सात साल के बेटे का सवाल सुनकरसोच में पड़ गया मैं
इस विकट कोरोना काल का एक कातर क्षणपंखा सरसरा रहा है