उलट-पुलट

हरि मृदुलहरि मृदुल

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चारों तरफ़ रौशनी ही रौशनी

इतनी रौशनी कि अँधेरे का है

बेसब्री से इंतज़ार

चारों तरफ़ एकदम चुप्पी

इतनी चुप्पी कि

ज़ोरों से चिल्लाने की है प्रतीक्षा

चारों तरफ़ भद्र जन

इतने भद्र जन कि भदेस का है

भरपूर स्वागत

चारों तरफ़ सुभाषित वाक्य

इतने सुभाषित वाक्य कि

गालियों के लिए है आदरपूर्ण जगह

हरि मृदुल
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हरि मृदुल

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