शीर्षासन

हरि मृदुलहरि मृदुल

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लगातार उल्टी चाल चल रही दुनिया को

उल्टे तरीक़े से ही देखा जा सकता है

सीधा

यही सोच करने लगा मैं शीर्षासन

इस शीर्षासन से दिमाग़ बड़ी तेज़ी से

सक्रिय हुआ

लेकिन फिर उतनी ही तेज़ी से

सुन्न भी पड़ गया

उल्टी दुनिया और भी उल्टी लगने लगी

तो बताओ सयानो कि अब कौन-सा

करना होगा आसन

आख़िर किस विधि सही-सही दिखेगी

यह दुनिया

एकदम उल्टी ही दिखाई दे रही है मुझे जो

एक अरसे से

हरि मृदुल
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हरि मृदुल

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मुनव्वर राना के शेरअब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करोतुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो— मुनव्वर रानाफिर से बदल के मिट्टी की सूरत करो मुझेफिर से बदल के मिट्टी की सूरत करो मुझेइज़्ज़त के साथ दुनिया से रुख़्सत करो मुझे— मुनव्वर रानाभूमिहीनभूख के शिकार पर निकले ये शिकारीएकदम मुकम्मल आदमी हैं— हुकुम ठाकुरप्रतारणानिकटवर्ती पहाड़ के तन परहरी घास का अस्तर,— हुमायूँ कबीरबुद्ध मुस्कराए हैं‘लाल इमली’ कहते ही इमली नहीं कौंधी दिमाग़ मेंजीभ में पानी नहीं आया— हरीशचंद्र पांडेयमुना इलाहाबाद में, संगम होती हुईयमुना इलाहाबाद मेंकभी-कभी मुझे यह साफ़ आसमान से काटी गई एक हल्की— हरीशचंद्र पांडे