अपरिचित लोगों से भी हो जाते हैं अपने
परिचित रिश्ते
अनजान जगह भी पहुँच गए तो
झट अनुमान से बन जाते हैं पावन संबंध
पुकारो बूढ़ी औरत को अम्मा या दादी
बूढ़़े आदमी को बोलो बाबा
नवयुवती को कह दो दीदी
मर्द साथ है यदि उसका तो
कह सकते हो भाभी
भाई साहब
बहन जी
चाचा-चाची
बेटा-बेटी
कुछ भी
कहने भर की देर कि
बँध गए अटूट स्नेहिल बंधन
सदियों से यूँ ही तो जुड़़े हुए हैं
एक देश में हम
ख़त्म हो जाएगा जिस दिन
ऐसे रिश्ते बनना
समझ लेना कि
मिट चुकी हमारी संस्कृति—
एक क़ौम








