पॉलिथीन की थैलियाँ चार

हरि मृदुलहरि मृदुल

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सामान लाने गया था बाज़ार

आ गईं साथ में पॉलिथीन की थैलियाँ चार

नर्म कपड़ों-सी

कुछ-कुछ पारदर्शी

हवा-पानी से बचाने की पूरी गारंटी

सभ्यता-संपन्नता की नई परिभाषा गढ़तीं

सामान ख़त्म हो गया दस दिन में

पॉलिथीन की थैलियाँ ही बची रह गईं

तो एक दिन मौक़ा पाकर इनमें से उड़ी एक

पतंग की तरह आकाश की ओर

एक फुदकी मेंढक की माफ़िक़

पौधों की जड़ों में

चली एक अजगर की चाल

धरती के अंदर

रही जो घर के भीतर

लिपटी मन के चारों ओर एक रात

हरि मृदुल
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हरि मृदुल

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