खेल ही खेल में

हरि मृदुलहरि मृदुल

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इक्के के सामने नहीं ठहर सका

बादशाह

बेगम कुछ न कर पाई

बादशाह के सामने

ग़ुलाम नतमस्तक हो गया

बेगम के आगे

दहला, नहला, अठ्ठा,

सत्ता, छग्गा, पंजा,

चौगा, तिग्गी...

सामर्थ्यवानों के समक्ष

आत्मसमर्पण करते गए

पर कौतुक हुआ

जब अदना-सी लगने वाली एक दुग्गी

तुरुप बन गई

और उसके आघात से

बलशाली इक्के तक की

मात हो गई

हरि मृदुल
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हरि मृदुल

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