आख़िर ऐसी बात कौन-सी
भर आए आँखों में डब-डब आँसू
पोंछते ही इनके फिर भर आने में है संदेह
इसलिए पोंछने की होती नहीं इच्छा
सूख रहे आँखों में ही अब
बस कोरों पर ही थोड़े बचे हुए हैं
शीशे के सम्मुख खड़े हो लिए
ऐसे दृश्य देखने के भी हम उत्सुक
आख़िर ऐसी बात कौन-सी
भर आए आँखों में डब-डब आँसू
पोंछते ही इनके फिर भर आने में है संदेह
इसलिए पोंछने की होती नहीं इच्छा
सूख रहे आँखों में ही अब
बस कोरों पर ही थोड़े बचे हुए हैं
शीशे के सम्मुख खड़े हो लिए
ऐसे दृश्य देखने के भी हम उत्सुक

सचमुच इतनी ऊँची इमारतें हैं किदेखने वाले की टोपी गिरने का क़िस्सा
दुनिया की सबसे सुरीली आवाज़जो तुम्हें सुनाई दे रही है
वाह रेडियो! तुम तो सचमुचबड़े ग़ज़ब के निकले यार
सात साल के बेटे का सवाल सुनकरसोच में पड़ गया मैं
इस विकट कोरोना काल का एक कातर क्षणपंखा सरसरा रहा है