जब जीभ सालम थी
तब मेरे पास बात नहीं थी कोई
मेरी जीभ काटकर
आपने मुझे बोलने के योग्य
कोई बात दे दी है
बहुत वक़्त जिए हम
बेबात बोलकर
कुछ वक़्त अब जीऐंगे
बेबोल बात के।
जब जीभ सालम थी
तब मेरे पास बात नहीं थी कोई
मेरी जीभ काटकर
आपने मुझे बोलने के योग्य
कोई बात दे दी है
बहुत वक़्त जिए हम
बेबात बोलकर
कुछ वक़्त अब जीऐंगे
बेबोल बात के।

पंजाबी के सुप्रतिष्ठित कवि, आलोचक, अनुवादक और संस्कृति-समीक्षक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।
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