मेरा वतन हिन्दोस्तान - नज़्म

फ़ीरोज़ा यासमीनफ़ीरोज़ा यासमीन

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ऐ मेरे प्यारे वतन हिन्दोस्तान

है बहुत दिलचस्प तेरी दास्तान

हर फ़ज़ा तेरी लुभाती है हमें

हर अदा तेरी तो भाती है हमें

तेरे हर गुलशन में पंछी नग़्मा-ख़्वाँ

आशियाँ-दर-आशियाँ रत्ब-उल-लिसाँ

मुख़्तलिफ़ तहज़ीब के इंसाँ यहाँ

बोलते हैं अपनी अपनी बोलियाँ

सोने चाँदी से अटी है ये ज़मीं

ऐसी धरती सारी दुनिया में नहीं

किस क़दर है दिल-नशीं तेरी फ़ज़ा

अर्ज़-ए-बतहा तक गई तेरी फ़ज़ा

'मीर' ओ 'ग़ालिब' 'हसरत' ओ 'चकबस्त' ने

भर दिए दफ़्तर तिरी तारीफ़ से

ख़ूबसूरत ऐ मिरे हिन्दोस्ताँ

तुझ पे करते हैं फ़िदा हम अपनी जाँ

है ख़ुदा-ए-पाक तेरा पासबाँ

ज़िंदा ओ पाइंदा-बाद हिन्दोस्तान

फ़ीरोज़ा यासमीन
About the poet

फ़ीरोज़ा यासमीन

जन्म : भोपाल, मध्य प्रदेश

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