भाँत-भँतीली ख़ुशबू प्यारी

Deendayal SharmaDeendayal Sharma15 Jul 1956

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भाँत-भँतीली ख़ुशबू प्यारी
महकी फूलों की फुलवारी ।

तितली फूलों पर मण्डराए
भौंरे अपना राग सुनाए
पत्ता-पत्ता हुआ हरा है
धरा हो गई हरियल सारी ।

सूरज के उगते ही देखो
चिडिय़ा चहके गीत सुनाए
ओस की बूूँदों से टकराकर
कण-कण को रश्मि चमकाए ।

मदमाती जब चली पवन तो
महक उठी है क्यारी-क्यारी ।

गेंदा और गुलाब-चमेली
सबकी ख़ुशबू है अलबेली
जिधर भी देखो मस्ती छाई
जीव-जगत के मन को भायी ।

अपनी मस्ती में हैं सारे
भोली शक्लें प्यारी-प्यारी ।।

Deendayal Sharma
About the poet

Deendayal Sharma

जन्म: 15 जुलाई 1956 (प्रमाण पत्र के अनुसार) जन्म स्थान: गांव- जसाना, तहसील- नोहर, जिला- हनुमानगढ़ (राज.) शिक्षा: एम. कॉम . (व्यावसायिक प्रशासन, 1981), पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर 1985) लेखन: हिन्दी व राजस्थानी दोनों भाषाओ…

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