राम रस मीठा रे

Dadu DayalDadu Dayal1 Jan 1544 – 1 Jan 1603

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राम रस मीठा रे, कोइ पीवै साधु सुजाण।
सदा रस पीवै प्रेमसूँ सो अबिनासी प्राण॥टेक॥

इहि रस मुनि लागे सबै, ब्रह्मा-बिसुन-महेस।
सुर नर साधू स्म्त जन, सो रस पीवै सेस॥१॥

सिध साधक जोगी-जती, सती सबै सुखदेव।
पीवत अंत न आवई, पीपा अरु रैदास।
पिवत कबीरा ना थक्या अजहूँ प्रेम पियास॥३॥

यह रस मीठा जिन पिया, सो रस ही महिं समाइ।
मीठे मीठा मिलि रह्या, दादू अनत न जाइ॥४॥

Dadu Dayal
About the poet

Dadu Dayal

Dadu Dayal ( 1544—1603) was a poet-sant , a religious reformator which have said against formalism and priestcraft.

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