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संगठित धन

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7) आपदर्थे धनं रक्षेच्छ्रीमतांकुतः किमापदः।
कदाचिच्चलिता लक्ष्मी संचिताऽपि विनश्यति।।

सभी को भविष्य में आने वाली मुसीबतो के लिए धन एकत्रित करना चाहिए। कभी ऐसा ना सोचें की धनवान व्यक्ति को मुसीबत कैसी? क्योकि जब धन साथ छोड़ता है तो संगठित धन भी तेजी से घटने लगता है।

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