यमराज की दिशा

चंद्रकांत देवतालेचंद्रकांत देवताले7 Nov 1936 – 14 Aug 2017

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माँ की ईश्वर से मुलाक़ात हुई या नहीं

कहना मुश्किल है

पर वह जताती थी जैसे

ईश्वर से उसकी बातचीत होती रहती है

और उससे प्राप्त सलाहों के अनुसार

ज़िंदगी जीने और दुख बर्दाश्त करने के

रास्ते ख़ोज लेती है

माँ ने एक बार मुझसे कहा था

दक्षिम की तरफ़ पैर करके मत सोना

वह मृत्यु की दिशा है

और यमराज को क्रुद्ध करना

बुद्धिमानी की बात नहीं

तब मैं छोटा था

और मैंने यमराज के घर का पता पूछा था

उसने बताया था

तुम जहाँ भी हो वहाँ से हमेशा दूर दक्षिण में

माँ की समझाइश के बाद

दक्षिण दिशा में पैर करके मैं कभी नहीं सोया

और इससे इतना फ़ायदा ज़रूर हुआ

दक्षिण दिशा पहचानने में

मुझे कभी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा

मैं दक्षिण में दूर-दूर तक गया

और मुझे हमेशा माँ याद आई

दक्षिण को लाँघ लेना संभव नहीं था

होता छोर तक पहुँच पाना

तो यमराज का घर देख लेता

पर आज जिधर भी पैर करके सोओ

वहीं दक्षिण दिशा हो जाती है

सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं

और वे सभी में एक साथ

अपनी दहकती आँखों सहित विराजते हैं

माँ अब नहीं है

और यमराज की दिशा भी वह नहीं रही

जो माँ जानती थी।

चंद्रकांत देवताले
About the poet

चंद्रकांत देवताले

सातवें दशक के समादृत कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : चंद्रकांत देवताले जन्म : 07/11/1936 | बैतूल, मध्य प्रदेश निधन : 14/08/2017 | इंदौर, मध्य प्रदेश समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि चंद्रकांत देवताले का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में 7 न…

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