घर में अकेली औरत के लिए

चंद्रकांत देवतालेचंद्रकांत देवताले7 Nov 1936 – 14 Aug 2017

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तुम्हें भूल जाना होगा समुद्र की मित्रता

और जाड़े के दिनों को

जिन्हें छल्ले की तरह उँगली में पहनकर

तुमने हवा और आकाश में उछाला था, पंखों में वसंत को बाँधकर

उड़ने वाली चिड़िया को पहचानने से

मुकर जाना ही अच्छा होगा...

तुम्हारा पति अभी बाहर है

तुम नहाओ जी भर कर

आईने के सामने कपड़े उतारो

आईने को देखो इतना कि वह

तड़कने-तड़कने को हो जाए

पर उसके तड़कने के पहले

अपनी परछाईं को हटा लो

घर की शांति के लिए यह ज़रूरी है

क्योंकि वह हमेशा के लिए नहीं

सिर्फ़ शाम तक के लिए बाहर है

फिर याद करते हुए सो जाओ

या चाहो तो अपनी पेटी को

उलट दो बीचोबीच फ़र्श पर

फिर एक-एक चीज़ को देखते हुए सोचो

और उन्हें जमाओ अपनी-अपनी जगह पर

अब वह आएगा

तुम्हें कुछ बना लेना चाहिए

खाने के लिए और ठीक से

हो जाना होगा... सुथरे घर की तरह

तुम्हारा पति

एक पालतू आदमी है या नहीं

यह बात बेमानी है

पर वह शक्की हो सकता है

इसलिए उसकी प्रतीक्षा करो

पर छज्जे पर खड़े होकर नहीं

कमरे के भीतर वक़्त का ठीक

हिसाब रखते हुए...

उसके आने के पहले

प्याज़ मत काटो

प्याज़ काटने से

शक की सुरसुराहट हो सकती है

बिस्तर पर अच्छी किताबें पटक दो

जिन्हें पढ़ना क़तई आवश्यक नहीं होगा

पर यह विचार पैदा करना अच्छा है

कि अकेले में तुम इन्हें पढ़ती हो...

चंद्रकांत देवताले
About the poet

चंद्रकांत देवताले

सातवें दशक के समादृत कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : चंद्रकांत देवताले जन्म : 07/11/1936 | बैतूल, मध्य प्रदेश निधन : 14/08/2017 | इंदौर, मध्य प्रदेश समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि चंद्रकांत देवताले का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में 7 न…

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