कम ख़ुदा न थी परोसने वाली

चंद्रकांत देवतालेचंद्रकांत देवताले7 Nov 1936 – 14 Aug 2017

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चार जने बैठे थे जीमने रात का भोजन

सब बच-बच कर खा रहे

तीनों बच्चे तक समझदार

पीते बीच-बीच में पानी

पिता लेते नक़ली डकार

पर कम ख़ुदा न थी परोसने वाली

बहुत है अभी इसमें

मैंने तो देर से खाया

कहते परोसती जाती

माँ थी

सबके बाद खाने वाली

जिसके लिए दाल नहीं

देवकी में बची थी हलचल

चुल्लू भर पानी की

और कटोरदान में भाप के चंद्रमा जैसी

रोटी की छाया थी।

चंद्रकांत देवताले
About the poet

चंद्रकांत देवताले

सातवें दशक के समादृत कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : चंद्रकांत देवताले जन्म : 07/11/1936 | बैतूल, मध्य प्रदेश निधन : 14/08/2017 | इंदौर, मध्य प्रदेश समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि चंद्रकांत देवताले का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में 7 न…

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