मैं एक ज्वाला हूँ
लकड़ी में बंद
धारा में बिजली
बादल में जमी चाँदनी
रात भर घूमती रहती हूँ ढूँढ़ती
घर पानी हवा,
मेरी आँखों में सागर हैं
तुम्हारी मुस्कुराहटों के
मैं अपने पेड़ को थामे हूँ
जो हसरत की गेंद-सा उछल रहा है
मैं एक ज्वाला हूँ
लकड़ी में बंद
धारा में बिजली
बादल में जमी चाँदनी
रात भर घूमती रहती हूँ ढूँढ़ती
घर पानी हवा,
मेरी आँखों में सागर हैं
तुम्हारी मुस्कुराहटों के
मैं अपने पेड़ को थामे हूँ
जो हसरत की गेंद-सा उछल रहा है

सुपरिचित कवयित्री। मूल नाम : चंपा वैद जन्म : 13/09/1930 | पंजाब निधन : 23/07/2017
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