तुम्हारी हर ऊँचाई का
माप
तुम्हारी हर साध की
राह
मेरी ही गोदी में फला है
तुम्हारा तप
स्वाध्याय
संवेदना
अध्यात्म
जब-जब भी तुम्हारे
मन के पाँव भटके
तुम्हें मेरी ही याद आई
मैंने तुम्हें थामा, राह सुझाई
तुम्हारी सारी तपस्याएँ
मेरे ही गोद में रंग लाईं
तुम्हारी हर ऊँचाई का
माप
तुम्हारी हर साध की
राह
मेरी ही गोदी में फला है
तुम्हारा तप
स्वाध्याय
संवेदना
अध्यात्म
जब-जब भी तुम्हारे
मन के पाँव भटके
तुम्हें मेरी ही याद आई
मैंने तुम्हें थामा, राह सुझाई
तुम्हारी सारी तपस्याएँ
मेरे ही गोद में रंग लाईं
