पहाड़-20

ब्रजरतन जोशीब्रजरतन जोशी

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तुम्हारी हर ऊँचाई का

माप

तुम्हारी हर साध की

राह

मेरी ही गोदी में फला है

तुम्हारा तप

स्वाध्याय

संवेदना

अध्यात्म

जब-जब भी तुम्हारे

मन के पाँव भटके

तुम्हें मेरी ही याद आई

मैंने तुम्हें थामा, राह सुझाई

तुम्हारी सारी तपस्याएँ

मेरे ही गोद में रंग लाईं

ब्रजरतन जोशी
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ब्रजरतन जोशी

ब्रजरतन जोशी

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