अपने होकर भी
न होने की विधि में
तुम्हारे संसार से दूर
पसरा हूँ मैं
अपने क्षत-विक्षत
चिर यौवन के साथ
मेरी दुनिया में
तुम्हारे स्वर
रचते-बसते हैं
मैं ढूँढ़ता हूँ उनमें
तुम्हारे होने को
होकर भी न होने की
विधि से
अपने होकर भी
न होने की विधि में
तुम्हारे संसार से दूर
पसरा हूँ मैं
अपने क्षत-विक्षत
चिर यौवन के साथ
मेरी दुनिया में
तुम्हारे स्वर
रचते-बसते हैं
मैं ढूँढ़ता हूँ उनमें
तुम्हारे होने को
होकर भी न होने की
विधि से
