न होने की विधि

ब्रजरतन जोशीब्रजरतन जोशी

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अपने होकर भी

न होने की विधि में

तुम्हारे संसार से दूर

पसरा हूँ मैं

अपने क्षत-विक्षत

चिर यौवन के साथ

मेरी दुनिया में

तुम्हारे स्वर

रचते-बसते हैं

मैं ढूँढ़ता हूँ उनमें

तुम्हारे होने को

होकर भी न होने की

विधि से

ब्रजरतन जोशी
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ब्रजरतन जोशी

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