वे बेख़बर लोग

ब्रजरतन जोशीब्रजरतन जोशी

1 min read · 12.4K reads

यह

मेरे जाने का नहीं

होने का समय है

पर लोग

बेख़बर हैं

मैं मायूस नहीं हूँ

परेशान हूँ

जो लोग हर काम

ठीक समय पर करते हैं

वे कैसे

मेरे होने की जगह

जानने को

नहीं पा रहे पहचान

ब्रजरतन जोशी
About the poet

ब्रजरतन जोशी

ब्रजरतन जोशी

View profile & all 36 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like