मर चुके लोग—हमारे अंदर रहते हैं। वे
चलते जाते हैं—चलते ही जाते हैं।
मेरे किशोरवय भाई सभी—गीतों से भरा जिस्म लिए
मरे—वे हमारे अंदर रहते हैं
रात से भोर होती है जब, जब सूरज चढ़ता है हमारे
माथे ऊपर
वे एक-एक कर बाहर आते हैं।
बिना हमसे संबोधित हुए
बिना किसी को छुए
वे बढ़ जाते हैं—जिधर माँदल बज रहा होता है—जहाँ
नाच की हर ताल से
बेपरवाह हुआ जाता है मन। वे आगे बढ़ जाते हैं—
पूरे बदन में गीत समेटे।
वे सभी चलकर जाते हैं, एक के पीछे एक—
क़तारबद्ध—
वे सभी तेज़ी से जा रहे किशोर। मरे। एक के पीछे एक—
क़तारबद्ध।








