धरती घूम रही है

बीरेंद्र चट्टोपाध्यायबीरेंद्र चट्टोपाध्याय

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बीरेंद्र चट्टोपाध्याय
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बीरेंद्र चट्टोपाध्याय

बीरेंद्र चट्टोपाध्याय

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मुनव्वर राना के शेरअब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करोतुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो— मुनव्वर रानाकुछ खिलौने कभी आँगन में दिखाई देतेकुछ खिलौने कभी आँगन में दिखाई देतेकाश हम भी किसी बच्चे को मिठाई देते— मुनव्वर रानास्मृतिजैसे-जैसे उमर बढ़ती जाती है हमारे दिमाग़ में स्मृतियोंका ख़ज़ाना बनने लगता है। ख़ज़ाने में लगातार और-और— भगतसिंह सोनीहड्डी का दर्दहल्के पीलेपन-युक्त सफ़ेद हड्डियों के जोड़चटख़ रहे हैं— भगतसिंह सोनीनवजातकअनागत दिन की गिनती करके पृथिवी के विशाल वक्ष मेंआगंतुक नवजातक का— बीरेन बरकटकीअहल्या पृथिवीवन्ध्या पृथिवी में अँधेरा उतर रहा हैअब बहुत रात है।— बीरेन बरकटकी