एक
राजा आते जाते हैं
राजा बदलते हैं
नीला लिबास पहनते हैं
लाल लिबास पहनते हैं
ये राजा आया
वो राजा गया
परिधानों का रंग बदलता है...
दिन नहीं बदलते!
पूरी दुनिया को ही निगल लेना चाहता है जो नंगा बच्चा
कुत्तों के साथ उसकी भात की लड़ाई जारी है, जारी रहेगी!
कब से पेट के भीतर जो आग लगी है, अभी भी जलेगी!
दो
राजा आते जाते हैं
आते हैं और जाते हैं
सिर्फ़ परिधानों का रंग बदलता है
सिर्फ़ मुखौटों का ढंग बदलता है—
पागल मेहर अली
दोनों हाथों बजाता है ताली
इस रास्ते, उस रास्ते
नाचते हुए, गाता है :
‘सब झूट हाय! सब झूट हाय! सब झूट हाय।’
तीन
जननी जन्मभूमि
सब देखकर सब सुनकर भी अंधी तुम!
सब समझते सब बूझते भी बहरी तुम!
तुम्हारा नंगा बच्चा
कब से हो गया वह मेहर अली,
कुत्तों का छीनकर खाता है भात
कुत्तों के सामने बजाता है ताली—
तुम नहीं बदलती;
वह भी नहीं बदलता।
चार
सिर्फ़ परिधानों का रंग बदलता है
सिर्फ़ परिधानों का ढंग बदलता है।








