...के लिए

बेबी शॉबेबी शॉ

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तुम्हारी चाहत के लिए

मेरी बँधी हुई नाव पड़ी है

द्वितीया के चंद्रमा को

सावधानी से तोड़ रही है रात्रि

पैरों में सूजन और घुँघरू

आँखों में काजल

मीठी गंध वाली कन्या

पूजा लेकर बैठी है

प्रेम हो तुम!

साधना भी

आज रात

ज़हर का घड़ा उठा लाओ...

बेबी शॉ
About the poet

बेबी शॉ

नई पीढ़ी की सुपरिचित-सम्मानित बांग्ला कवि-गद्यकार-अनुवादक। बारह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी में भी कविताएँ लिखती हैं।

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