ब्लड डोनर और जाति का ओनर

बच्चा लाल 'उन्मेष'बच्चा लाल 'उन्मेष'

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जातियाँ आपस में काम लेती हैं

पर जाने का नाम नहीं लेतीं

जातियाँ उस जात की तरह हैं

कि अम्मा थके तो बच्चे सँभालें

पीस दी जाती हैं हर रोज़ जिसमें

घुन की तरह तमाम मानवीय संवेदनाएँ

भुरभुरी हो जाती हैं निष्पक्ष आत्माएँ

फिर शौक़ से बनाई जाती हैं रोटियाँ

कड़ाही में डाल दिए जाते हैं

निरीह हिरण के दूधमुँहे बच्चे

और साथ में ही उनकी भी बोटियाँ

बनाए जाते हैं हड्डियों के कल्छुल

दिए जाते हैं रक्त में डूबे आँख के तड़के

मृगनयन चटक-चटक कर

गिरते हैं जब सीता की थाली में

देखते हैं लव और कुश को

उन्हीं भूँजी आँखों से

कि राम सीखा रहे हैं उन्हें

कि हिरण का शिकार कैसे करें

कैसे कराएँ रक्त का पान अपनी नसों को

कि वीर्य से पोषित होती हैं जातियाँ

जातियाँ रक्त के लेन-देन से नहीं मरा करतीं बच्चों…

बच्चा लाल 'उन्मेष'
About the poet

बच्चा लाल 'उन्मेष'

सुपरिचित कवि। 'कौन जात हो भाई', 'छिछले प्रश्न गहरे उत्तर' और 'बहार के पतझड़' शीर्षक से तीन कविता-संग्रह प्रकाशित।

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