तुम्हारा ईश्वर
इतना ही दयावान है
तो क्यों नहीं तोड़ देता है
ज़बरदस्ती एक नन्ही-सी जान के
गले में डाला गया मंगलसूत्र
जब मंदिर की चौखट से
धर्म के ठेकेदारों द्वारा
यह कहकर दुत्कार दिया जाता है
मासिक धर्म में है
अपवित्र है
अभी प्रवेश वर्जित है
तो क्यों नहीं
तुम्हारा ईश्वर बोलता है कि
नहीं यह सर्वथा अन्याय है
मेरी माँ और उसकी कोख के साथ
प्रेम के लिए
सिर्फ़ एक
कोना तलाश रहे
दो में से
जब लड़की को गंजा करके
अधनंगा सारे शहर में घुमाया जाता है
तो क्यों नहीं
ईश्वर की तीसरी आँख खुलती
तुम्हारा ईश्वर
अगर इतना ही बलशाली है
तो क्यों नहीं
पैरों से रौंद देता है
उन सारे दरिंदों को
जिनकी वजह से
लड़कियाँ रात में विचरने से डरती हैं
मैं कहता हूँ
तुम्हारा ईश्वर भी
पितृसत्ता को
स्थापित करने का प्रमुख ज़रिया है
क्योंकि जब बात स्त्री की होती है
तो तुम्हारे ईश्वर का पाँव सूज जाता है
हाथ टूट जाते हैं
ज़बान में छाले पड़ जाते हैं
और आँख मूँद वह सो जाता है।








