है मरण का भय सभी को,
चाहता नर ज़िंदगी को
सोचता हूँ देख आऊँ—
मृत्यु के उस पार क्या है?
जीवन यहाँ अश्रु में घुलते,
बचपन हैं अभाव में पलते
इसीलिए यह जिज्ञासा है—
भाग्य का आधार क्या है?
अग्नि परीक्षा नियति जानकी,
मर्यादा बस अक्षुण्ण राम की
कैसा धर्म, कौन-सा समाज—
रीति-नीति व्यापार क्या है?
मंदिरों में स्थापित हो,
करवा रही निज आरती जो
उस प्रस्तर प्रतिमा का बंधु—
श्वास पर अधिकार क्या है?








