भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है

मुनव्वर रानामुनव्वर राना26 Sept 1952 – 14 Jan 2024

1 min read · 12.4K reads

भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है

मोहब्बत करने वाला इस लिए बरबाद रहता है

अगर सोने के पिंजड़े में भी रहता है तो क़ैदी है

परिंदा तो वही होता है जो आज़ाद रहता है

चमन में घूमने फिरने के कुछ आदाब होते हैं

उधर हरगिज़ नहीं जाना उधर सय्याद रहता है

लिपट जाती है सारे रास्तों की याद बचपन में

जिधर से भी गुज़रता हूँ मैं रस्ता याद रहता है

हमें भी अपने अच्छे दिन अभी तक याद हैं 'राना'

हर इक इंसान को अपना ज़माना याद रहता है

मुनव्वर राना
About the poet

मुनव्वर राना

मुनव्वर राना (जन्म: 26 नवंबर 1952,मृत्यु: 14 जनवरी 2024, रायबरेली, उत्तर प्रदेश) उर्दू भाषा के साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता शाहदाबा के लिये उन्हें सन् 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।[1] वे लखनऊ में रहते हैं। भारत-पाकिस्तान…

View profile & all 45 Poems / Stories

More from मुनव्वर राना

  1. इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए

    इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिएआप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए

    12.4K reads
  2. किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई

    किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आईमैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई

    12.4K reads
  3. बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना

    बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होनाआप आसान समझते हैं मुनव्वर होना

    12.4K reads
  4. ख़फ़ा होना ज़रा सी बात पर तलवार हो जाना

    ख़फ़ा होना ज़रा सी बात पर तलवार हो जानामगर फिर ख़ुद-ब-ख़ुद वो आप का गुलनार हो जाना

    12.4K reads
  5. अलमारी से ख़त उस के पुराने निकल आए

    अलमारी से ख़त उस के पुराने निकल आएफिर से मिरे चेहरे पे ये दाने निकल आए

    12.4K reads

More Poetry & Stories You May Like