नीयत और नियति

अजंता देवअजंता देव31 Oct 1958

1 min read · 12.4K reads

चुन लेने पर

चीज़ें मुश्किल हो जाती हैं

तय हो जाती है

नीयत और नियति

चुनते ही आधा रह जाता है प्रेम

आधी बन जाती है घृणा

शुरू में सब कुछ पूरा होता है

जैसे बच्चे

जो नहीं चुनते हमें

अचानक साथ हो जाते हैं

बाद में कभी आ ही जाती है

चुनने की कला

आरी की तरह हाथ में

जिससे बनाने लगते हैं

कभी मेज़

कभी कुल्हाड़ी।

अजंता देव
About the poet

अजंता देव

सुपरिचित कवयित्री। कविताओं में उपस्थित संगीतात्मक वैभव के लिए उल्लेखनीय। मूल नाम : अजंता देव जन्म : 31/10/1958 | जोधपुर, राजस्थान अजंता देव का जन्म जोधपुर के एक प्रवासी बंगाल परिवार में हुआ। उनकी उच्च शिक्षा राजस्‍थान विश्वविद्यालय से पूरी हुई। शास्‍त्रीय संग…

View profile & all 31 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like