हुलिया

अजंता देवअजंता देव31 Oct 1958

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मेरी आँखें

नहीं हैं वैसी भूरी

मेरी नाक

नहीं है उतनी गोल

रंग बदलता रहता है

मेरी त्वचा का मौसम के साथ

पिछले साल

कटवा लिए हैं बाल

मैं चित्र नहीं हूँ

कि धूल पोंछते ही

निकल आएगी वही हँसी

हुलिया लिखते वक़्त भी

बदलता रहता है मेरा चेहरा

अजंता देव
About the poet

अजंता देव

सुपरिचित कवयित्री। कविताओं में उपस्थित संगीतात्मक वैभव के लिए उल्लेखनीय। मूल नाम : अजंता देव जन्म : 31/10/1958 | जोधपुर, राजस्थान अजंता देव का जन्म जोधपुर के एक प्रवासी बंगाल परिवार में हुआ। उनकी उच्च शिक्षा राजस्‍थान विश्वविद्यालय से पूरी हुई। शास्‍त्रीय संग…

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