सब्ज़ीवाला

अजंता देवअजंता देव31 Oct 1958

1 min read · 12.4K reads

उसने सबसे ऊपर सजा रखा है

हरा धनिया

ठेले पर उठाए बाग़-बग़ीचा

वह आएगा

उससे पहले मगर

लुढ़कता हुआ आलू आएगा

पीले और मुरझाए लोगों की बस्ती में

हरी-भरी ख़बर लेकर

पीले पत्ते-सी अटकी इस बूढ़ी सदी को

ठेले से लगाता हुआ धक्का

वह आज भी आएगा

आता ही रहेगा हमारी गलियों में

अजंता देव
About the poet

अजंता देव

सुपरिचित कवयित्री। कविताओं में उपस्थित संगीतात्मक वैभव के लिए उल्लेखनीय। मूल नाम : अजंता देव जन्म : 31/10/1958 | जोधपुर, राजस्थान अजंता देव का जन्म जोधपुर के एक प्रवासी बंगाल परिवार में हुआ। उनकी उच्च शिक्षा राजस्‍थान विश्वविद्यालय से पूरी हुई। शास्‍त्रीय संग…

View profile & all 31 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like

मुनव्वर राना के शेरअब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करोतुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो— मुनव्वर रानाहाँ इजाज़त है अगर कोई कहानी और हैहाँ इजाज़त है अगर कोई कहानी और हैइन कटोरों में अभी थोड़ा सा पानी और है— मुनव्वर रानाजबकि भारत उन्हीं का हैकहाँ है उनका ठिकाना? त्रिपुरा, असम, बंगाल,संताल परगना, दक्षिण भारत, मेघालय में— बीरेंद्र चट्टोपाध्यायभूमिहीनभूख के शिकार पर निकले ये शिकारीएकदम मुकम्मल आदमी हैं— हुकुम ठाकुरतालीएक ताली हमारी नाकामी के लिए।माफ़ कीजिए, एक ताली हमारी नाकामी को ढँकने के लिए।— फ़रीद ख़ाँकुछ नहीं चाहने वाली लड़कीसोलह की यह लड़की दो-तीन साल पहले तकपेड़-पौधों पर रखती थी पाँव— ऐश्वर्य राज