उसने सबसे ऊपर सजा रखा है
हरा धनिया
ठेले पर उठाए बाग़-बग़ीचा
वह आएगा
उससे पहले मगर
लुढ़कता हुआ आलू आएगा
पीले और मुरझाए लोगों की बस्ती में
हरी-भरी ख़बर लेकर
पीले पत्ते-सी अटकी इस बूढ़ी सदी को
ठेले से लगाता हुआ धक्का
वह आज भी आएगा
आता ही रहेगा हमारी गलियों में








