'मुझे कुछ भी महसूस नहीं होता'
यह वाक्य प्रेम में
स्वयं के ख़िलाफ़ दिया गया
सबसे बड़ा धोखा है।
एकांत में बहाए गए आँसू
उस धोखे के लिए किया गया पश्चताप है।
हम प्रेम करते हैं
स्वीकारने से डरते हैं
यह डर हमारा नहीं
परंपरा है
जो हमारे संस्कार तय करता है।
'मुझे कुछ भी महसूस नहीं होता'
यह वाक्य प्रेम में
स्वयं के ख़िलाफ़ दिया गया
सबसे बड़ा धोखा है।
एकांत में बहाए गए आँसू
उस धोखे के लिए किया गया पश्चताप है।
हम प्रेम करते हैं
स्वीकारने से डरते हैं
यह डर हमारा नहीं
परंपरा है
जो हमारे संस्कार तय करता है।
