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Poetry & Stories
लाला-ज़ारों में ज़र्द फूल हूँ मैं - आबिद मुनावरी
लाला-ज़ारों में ज़र्द फूल हूँ मैंफ़स्ल-ए-गुल है मगर मलूल हूँ मैं
अगले पड़ाव पर यूँही ख़ेमा लगाओगे - आबिद मुनावरी
अगले पड़ाव पर यूँही ख़ेमा लगाओगेजितनी भी है सफ़र की थकन भूल जाओगे
जब आसमान पर मह-ओ-अख़्तर पलट कर आए - आबिद मुनावरी
जब आसमान पर मह-ओ-अख़्तर पलट कर आएहम रुख़ पे दिन की धूप लिए घर पलट कर आए
ख़ुद सवाल आप ही जवाब हूँ मैं - आबिद मुनावरी
ख़ुद सवाल आप ही जवाब हूँ मैंज़िंदगी की खुली किताब हूँ मैं
ज़िंदगी भर जिन्हों ने देखे ख़्वाब - आबिद मुनावरी
ज़िंदगी भर जिन्हों ने देखे ख़्वाबउन को बख़्शे गए हैं फिर से ख़्वाब
आबिद मुनावरी: Quick Answers
When was आबिद मुनावरी born?
आबिद मुनावरी was born on 2 September 1938. Associated place: जम्मू एवं कश्मीर.
Where can I read आबिद मुनावरी's poetry?
Kavishala has 8 poems and stories and 1 couplets (sher) by आबिद मुनावरी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by आबिद मुनावरी
लाला-ज़ारों में ज़र्द फूल हूँ मैं - आबिद मुनावरी
लाला-ज़ारों में ज़र्द फूल हूँ मैंफ़स्ल-ए-गुल है मगर मलूल हूँ मैं
अगले पड़ाव पर यूँही ख़ेमा लगाओगे - आबिद मुनावरी
अगले पड़ाव पर यूँही ख़ेमा लगाओगेजितनी भी है सफ़र की थकन भूल जाओगे
जब आसमान पर मह-ओ-अख़्तर पलट कर आए - आबिद मुनावरी
जब आसमान पर मह-ओ-अख़्तर पलट कर आएहम रुख़ पे दिन की धूप लिए घर पलट कर आए
ख़ुद सवाल आप ही जवाब हूँ मैं - आबिद मुनावरी
ख़ुद सवाल आप ही जवाब हूँ मैंज़िंदगी की खुली किताब हूँ मैं
ज़िंदगी भर जिन्हों ने देखे ख़्वाब - आबिद मुनावरी
ज़िंदगी भर जिन्हों ने देखे ख़्वाबउन को बख़्शे गए हैं फिर से ख़्वाब
मुक़द्दर में साहिल कहाँ है मियाँ - आबिद मुनावरी
मुक़द्दर में साहिल कहाँ है मियाँमिरी नाव बे-बादबाँ है मियाँ
क्यूँ न अपनी ख़ूबी-ए-क़िस्मत पे इतराती हवा - आबिद मुनावरी
क्यूँ न अपनी ख़ूबी-ए-क़िस्मत पे इतराती हवाफूल जैसे इक बदन को छू कर आई थी हवा
बे-तमन्ना हूँ ख़स्ता-जान हूँ मैं - आबिद मुनावरी
बे-तमन्ना हूँ ख़स्ता-जान हूँ मैंएक उजड़ा हुआ मकान हूँ मैं
Selected Quotes by आबिद मुनावरी (चुनिंदा उद्धरण)
क्यूँ न अपनी ख़ूबी-ए-क़िस्मत पे इतराती हवा फूल जैसे इक बदन को छू कर आई थी हवाजब आसमान पर मह-ओ-अख़्तर पलट कर आएहम रुख़ पे दिन की धूप लिए घर पलट कर आएमुक़द्दर में साहिल कहाँ है मियाँमिरी नाव बे-बादबाँ है मियाँअगले पड़ाव पर यूँही ख़ेमा लगाओगेजितनी भी है सफ़र की थकन भूल जाओगेलाला-ज़ारों में ज़र्द फूल हूँ मैंफ़स्ल-ए-गुल है मगर मलूल हूँ मैंख़ुद सवाल आप ही जवाब हूँ मैंज़िंदगी की खुली किताब हूँ मैंCouplets (Sher) by आबिद मुनावरी
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