आबिद मुनावरी, poet
Sootradhar · Author

आबिद मुनावरी

आबिद मुनावरी

2 September 1938जम्मू एवं कश्मीर

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Selected Quotes

क्यूँ न अपनी ख़ूबी-ए-क़िस्मत पे इतराती हवा फूल जैसे इक बदन को छू कर आई थी हवा
— आबिद मुनावरी
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जब आसमान पर मह-ओ-अख़्तर पलट कर आएहम रुख़ पे दिन की धूप लिए घर पलट कर आए
— आबिद मुनावरी
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Poetry & Stories

  1. लाला-ज़ारों में ज़र्द फूल हूँ मैं - आबिद मुनावरी

    लाला-ज़ारों में ज़र्द फूल हूँ मैंफ़स्ल-ए-गुल है मगर मलूल हूँ मैं

    4 min read · 12.3K reads
  2. अगले पड़ाव पर यूँही ख़ेमा लगाओगे - आबिद मुनावरी

    अगले पड़ाव पर यूँही ख़ेमा लगाओगेजितनी भी है सफ़र की थकन भूल जाओगे

    4 min read · 12.3K reads
  3. जब आसमान पर मह-ओ-अख़्तर पलट कर आए - आबिद मुनावरी

    जब आसमान पर मह-ओ-अख़्तर पलट कर आएहम रुख़ पे दिन की धूप लिए घर पलट कर आए

    4 min read · 12.3K reads
  4. ख़ुद सवाल आप ही जवाब हूँ मैं - आबिद मुनावरी

    ख़ुद सवाल आप ही जवाब हूँ मैंज़िंदगी की खुली किताब हूँ मैं

    4 min read · 12.3K reads
  5. ज़िंदगी भर जिन्हों ने देखे ख़्वाब - आबिद मुनावरी

    ज़िंदगी भर जिन्हों ने देखे ख़्वाबउन को बख़्शे गए हैं फिर से ख़्वाब

    3 min read · 12.3K reads

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