नक़्श की तरह उभरना भी तुम्ही से सीखा

ज़ेहरा निगाहज़ेहरा निगाह14 May 1936

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नक़्श की तरह उभरना भी तुम्ही से सीखा

रफ़्ता रफ़्ता नज़र आना भी तुम्ही से सीखा

तुम से हासिल हुआ इक गहरे समुंदर का सुकूत

और हर मौज से लड़ना भी तुम्ही से सीखा

अच्छे शेरों की परख तुम ने ही सिखलाई मुझे

अपने अंदाज़ से कहना भी तुम्ही से सीखा

तुम ने समझाए मिरी सोच को आदाब अदब

लफ़्ज़ ओ मअनी से उलझना भी तुम्ही से सीखा

रिश्ता-ए-नाज़ को जाना भी तो तुम से जाना

जामा-ए-फ़ख़्र पहनना भी तुम्ही से सीखा

छोटी सी बात पे ख़ुश होना मुझे आता था

पर बड़ी बात पे चुप रहना तुम्ही से सीखा

ज़ेहरा निगाह
About the poet

ज़ेहरा निगाह

मूल नाम : ज़ेहरा निगाह जन्म : 14 May 1936 | हैदराबाद, सिंध Zehra Nigah is an Urdu poet and scriptwriter of Pakistan. She has written several television serials. She was born on 14th May, 1937 in Hyderabad, India and migrated to Pakistan with her parents during…

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