प्रेम में हम-तुम

यतीश कुमारयतीश कुमार21 Aug 1976

1 min read · 12.4K reads

मेरी छोटी-सी दुनिया में

तुम्हारे पाँव पड़ते ही

स्वर्ग बलाएँ लेता है

चाँद टकटकी लगाकर ताकता है

तुम्हारे आते ही मन के पोखर में

कुम्हलाए कमल खिल उठते हैं

उजास यूँ फैलता हैं

कि तारीक साये लरजकर छुप जाएँ

तुम्हारी हथेली इतनी बड़ी है

कि अक्सर समय को ढक देती है

और जब भी मैं मुठ्ठी बंद करता हूँ

तो तुम गुदगुदा देती हो

अरबी खजूर-सी मिठास

और शहद-सा ठहराव लिए

कृष्णपक्ष का हँसिया-सा चाँद

मेरी पीठ पर टहलता है

हम नदी की दो धाराओं की तरह मिलेंगे

हम चाँद बन समंदर में डूबेंगे

हम गोंद बन छाल की नमी में गुम रहेंगे

हम पराग बन फूलों को बोसे देंगे

और यूँ हर बार उगेंगे

प्रेम में पेड़ की पत्तियों की तरह।

यतीश कुमार
About the poet

यतीश कुमार

सुपरिचित कवि-लेखक। कविताओं की दो पुस्तकें 'अन्तस की खुरचन' और 'आविर्भाव' शीर्षक से प्रकाशित । मूल नाम : यतीश कुमार जन्म : 21/08/1976 | मुंगेर, बिहार 21 अगस्त 1976 को मुंगेर (बिहार) में जन्मे यतीश कुमार ने कविता और कहानी के साथ-साथ चर्चित उपन्यासों, कहानियों व…

View profile & all 36 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like