Selected Quotes
Poetry & Stories
बेवजह दिल पे कोई - उर्मिलेश
बेवजह दिल पे कोई बोझ न भारी रखियेज़िन्दगी जंग है इस जंग को जारी रखिये
आज है, कल हुई - उर्मिलेश
आज है, कल हुई, हुई, न हुईछांव हर पल हुई, हुई, न हुई
अब बुज़ुर्गों के - उर्मिलेश
अब बुज़ुर्गों के फ़साने नहीं अच्छे लगतेमेरे बच्चों को ये ताने नहीं अच्छे लगते।।
मौसम की चोट - उर्मिलेश
चोट मौसम ने दी कुछ इस तरह गहरी हमको।अब तो हर सुबह भी लगती है दुपहरी हमको।।
उसकी चूड़ी - उर्मिलेश
उसकी चूड़ी, उसकी बेंदी, उसकी चुनर से अलग।मैं सफर में भी न हो पाया कभी घर से अलग।
उर्मिलेश: Quick Answers
When was उर्मिलेश born?
उर्मिलेश was born on 6 September 1951. Associated place: इस्लामनगर, बदायूँ, उत्तर प्रदेश, भारत.
When did उर्मिलेश die?
उर्मिलेश passed away on 16 September 2005.
Where can I read उर्मिलेश's poetry?
Kavishala has 49 poems and stories and 1 couplets (sher) by उर्मिलेश, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by उर्मिलेश
बेवजह दिल पे कोई - उर्मिलेश
बेवजह दिल पे कोई बोझ न भारी रखियेज़िन्दगी जंग है इस जंग को जारी रखिये
आज है, कल हुई - उर्मिलेश
आज है, कल हुई, हुई, न हुईछांव हर पल हुई, हुई, न हुई
अब बुज़ुर्गों के - उर्मिलेश
अब बुज़ुर्गों के फ़साने नहीं अच्छे लगतेमेरे बच्चों को ये ताने नहीं अच्छे लगते।।
मौसम की चोट - उर्मिलेश
चोट मौसम ने दी कुछ इस तरह गहरी हमको।अब तो हर सुबह भी लगती है दुपहरी हमको।।
उसकी चूड़ी - उर्मिलेश
उसकी चूड़ी, उसकी बेंदी, उसकी चुनर से अलग।मैं सफर में भी न हो पाया कभी घर से अलग।
शत-शत नमन - उर्मिलेश
मिटाकर शत्रु को जो मिट गये खुद आन की खातिरउन्हें शत्-शत् नमन मेरा, उन्हें शत्-शत् नमन मेरा !
स्वतंत्रता बनी रहे - उर्मिलेश
न और कोई कामनायही है सिर्फ़ याचना
तेरी राह में क़ैदखाने पड़ेंगे - उर्मिलेश
तेरी राह में क़ैदखाने पड़ेंगेमगर तुझ को ख़तरे उठाने पड़ेंगे
ये ख़बर भी छापिएगा आज के अख़बार के - उर्मिलेश
ये ख़बर भी छापिएगा आज के अख़बार केरूह भी बिकने लगी है जिस्म के बाज़ार में
पूरी हिम्मत के साथ बोलेंगे - उर्मिलेश
पूरी हिम्मत के साथ बोलेंगेजो सही है वो बात बोलेंगे
तू इन बूढ़े दरख्तों की हवाएँ साथ रख लेना - उर्मिलेश
तू इन बूढ़े दरख्तों की हवाएँ साथ रख लेनासफ़र में काम आयेंगी दुआएँ साथ रख लेना
हाथ अपनी भूल पर कुछ तुम मलो,कुछ हम मलें - उर्मिलेश
हाथ अपनी भूल पर कुछ तुम मलो,कुछ हम मलेंहर तपन मिट जायेगी कुछ तुम ढलो, कुछ हम ढलें
Selected Quotes by उर्मिलेश (चुनिंदा उद्धरण)
हम न उर्दू में न हिन्दी में ग़ज़ल कहते हैं हम तो बस आप की बोली में ग़ज़ल कहते हैंबेवजह दिल पे कोई बोझ न भारी रखियेज़िन्दगी जंग है इस जंग को जारी रखियेआज है, कल हुई, हुई, न हुईछांव हर पल हुई, हुई, न हुईअब बुज़ुर्गों के फ़साने नहीं अच्छे लगतेमेरे बच्चों को ये ताने नहीं अच्छे लगते।।चोट मौसम ने दी कुछ इस तरह गहरी हमको।अब तो हर सुबह भी लगती है दुपहरी हमको।।उसकी चूड़ी, उसकी बेंदी, उसकी चुनर से अलग।मैं सफर में भी न हो पाया कभी घर से अलग।Couplets (Sher) by उर्मिलेश
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