About उपासना झा
नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री।
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About उपासना झा
नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री।
उपासना झा: Quick Answers
Who is उपासना झा?
नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री।
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Kavishala has 16 poems and stories by उपासना झा, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by उपासना झा
इच्छा
तुम्हारी छाती और कंधों परदेखती हूँ पिघला हुआ सुवर्ण
बासी रोटियाँ
सबको गर्म खाना खिलाते हुएअक्सर माँ के हिस्से आती रहीं बची हुई रोटियाँ
बनारस क्या शहर है बस...!
उगते सूर्य को अर्घ्य देकर हीविदा होती है अरुंधति
अभिसार
इस तेज़ भागती दुनिया मेंएक दुपहर
बाढ़ के समय प्रार्थना
ओ मेरी माँ!मेरे पूर्वजों की माँ!
प्रेमिका
चिट्ठी की वह पँक्ति है प्रेमिकाजो अनावश्यक मान हटाई जा सकती है
ग्यारह बरस की माँ
उसे नहीं भाती देर रातशिशु की रुलाई
जमाई-पूजन
जिन हाथों ने मारा तुम्हारी बेटियों कोउन हाथों में भर-भर कर देते रहे मिठाई और फलों की तश्तरियाँ
अनंत ध्वनियाँ
स्मृतियाँ केवल अतीत की छाँह भर नहीं होतींवे होती हैं जीवन का अब तक हुआ संवर्द्धन
महामाया
ओ मेरी कुलदेवी!कृष्ण की भगिनी
कोजागरा
ऋतुस्नानोपरांत गीले हैं केश वसुमती केपैरों की एड़ियाँ अरुणाभ
गीदड़ के दाँत
आठ महीने की गर्भवती वह स्त्रीरुग्ण काया और शिथिल क़दमों से कछुए की तरह
Selected Quotes by उपासना झा (चुनिंदा उद्धरण)
ओ मेरी माँ!मेरे पूर्वजों की माँ!उसे नहीं भाती देर रातशिशु की रुलाईजिन हाथों ने मारा तुम्हारी बेटियों कोउन हाथों में भर-भर कर देते रहे मिठाई और फलों की तश्तरियाँउगते सूर्य को अर्घ्य देकर हीविदा होती है अरुंधतिस्मृतियाँ केवल अतीत की छाँह भर नहीं होतींवे होती हैं जीवन का अब तक हुआ संवर्द्धनओ मेरी कुलदेवी!कृष्ण की भगिनीVideos on उपासना झा
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