Selected Quotes
Poetry & Stories
आरर डाल
सचमुच, इधर तुम्हारी याद तो नहीं आई,झूठ क्या कहूँ। पूरे दिन मशीन पर खटना,
पथ पर चलते रहो निरंतर
पथ परचलते रहो निरंतर
आज मैं तुम्हारा हूँ
कल मेरे प्राणों में कोई रो रहा था। बाहर सब शांत था। भीतर भीतर भारी व्यथा भर गई थी। जी बड़ा उदास था। कौन-सी हवा थी वह जो अपनी लहरों से घेर घेरकर मुझको बाँध गई।किसका दुख यह मेरे मन में आकर ठहरा। किसने गुमनाम पत्र यह अपना भेजा है। मैंने जो पाया है उसको कैसे अपने अंदर के कोने में मौन पड़ा रहने दूँ? अगर किसी राही को काँटा गड़ जाता है तो क्या वह काँटे को लिए दिए उसी तरह चलता है? मैं इसका क्या करूँ?
वही त्रिलोचन है
वही त्रिलोचन है, वह—जिस के तन पर गंदेकपड़े हैं। कपड़े भी कैसे—फटे लटे हैं
उनका हो जाता हूँ
चोट जभी लगती हैतभी हँस देता हूँ
त्रिलोचन: Quick Answers
When was त्रिलोचन born?
त्रिलोचन was born on 20 September 1917. Associated place: चिरानीपट्टी, कटघरा पट्टी, जिला सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत.
When did त्रिलोचन die?
त्रिलोचन passed away on 9 September 2007.
Where can I read त्रिलोचन's poetry?
Kavishala has 28 poems and stories by त्रिलोचन, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by त्रिलोचन
आरर डाल
सचमुच, इधर तुम्हारी याद तो नहीं आई,झूठ क्या कहूँ। पूरे दिन मशीन पर खटना,
पथ पर चलते रहो निरंतर
पथ परचलते रहो निरंतर
आज मैं तुम्हारा हूँ
कल मेरे प्राणों में कोई रो रहा था। बाहर सब शांत था। भीतर भीतर भारी व्यथा भर गई थी। जी बड़ा उदास था। कौन-सी हवा थी वह जो अपनी लहरों से घेर घेरकर मुझको बाँध गई।किसका दुख यह मेरे मन में आकर ठहरा। किसने गुमनाम पत्र यह अपना भेजा है। मैंने जो पाया है उसको कैसे अपने अंदर के कोने में मौन पड़ा रहने दूँ? अगर किसी राही को काँटा गड़ जाता है तो क्या वह काँटे को लिए दिए उसी तरह चलता है? मैं इसका क्या करूँ?
वही त्रिलोचन है
वही त्रिलोचन है, वह—जिस के तन पर गंदेकपड़े हैं। कपड़े भी कैसे—फटे लटे हैं
उनका हो जाता हूँ
चोट जभी लगती हैतभी हँस देता हूँ
भीख माँगते उसी त्रिलोचन को देखा कल
भीख माँगते उसी त्रिलोचन को देखा कलजिस को समझे था है तो है यह फ़ौलादी।
धूप सुंदर
धूप सुंदरधूप में
सॉनेट का पथ
इधर त्रिलोचन सॉनेट के ही पथ पर दौड़ासॉनेट सॉनेट सॉनेट सॉनेट क्या कर डाला
अस्वस्थ होने पर
मित्रों से बात करना अच्छा हैऔर यदि मुँह से बात ही न निकले तो
आत्मालोचन
शब्द,मालूम है,
आज का दिन बादलों में खो गया था
आज का दिन बादलों में खो गया थादृष्टि में आकर शशक जैसे
तुम्हें सौंपता हूँ
फूल मेरे जीवन में आ रहे हैंसौरभ से दसों दिशाएँ
Selected Quotes by त्रिलोचन (चुनिंदा उद्धरण)
चोट जभी लगती हैतभी हँस देता हूँभीख माँगते उसी त्रिलोचन को देखा कलजिस को समझे था है तो है यह फ़ौलादी।सचमुच, इधर तुम्हारी याद तो नहीं आई,झूठ क्या कहूँ। पूरे दिन मशीन पर खटना,अगर किसी राही को काँटा गड़ जाता है तो क्या वह काँटे को लिए दिए उसी तरह चलता है?फूल मेरे जीवन में आ रहे हैंसौरभ से दसों दिशाएँवही त्रिलोचन है, वह—जिस के तन पर गंदेकपड़े हैं। कपड़े भी कैसे—फटे लटे हैंVideos on त्रिलोचन
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