त्रिलोचन, poet
Sootradhar · Author

त्रिलोचन

त्रिलोचन

20 September 1917 – 9 September 2007चिरानीपट्टी, कटघरा पट्टी, जिला सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत

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Selected Quotes

चोट जभी लगती हैतभी हँस देता हूँ
— त्रिलोचन
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भीख माँगते उसी त्रिलोचन को देखा कलजिस को समझे था है तो है यह फ़ौलादी।
— त्रिलोचन
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Poetry & Stories

  1. आरर डाल

    सचमुच, इधर तुम्हारी याद तो नहीं आई,झूठ क्या कहूँ। पूरे दिन मशीन पर खटना,

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  2. पथ पर चलते रहो निरंतर

    पथ परचलते रहो निरंतर

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  3. आज मैं तुम्हारा हूँ

    कल मेरे प्राणों में कोई रो रहा था। बाहर सब शांत था। भीतर भीतर भारी व्यथा भर गई थी। जी बड़ा उदास था। कौन-सी हवा थी वह जो अपनी लहरों से घेर घेरकर मुझको बाँध गई।किसका दुख यह मेरे मन में आकर ठहरा। किसने गुमनाम पत्र यह अपना भेजा है। मैंने जो पाया है उसको कैसे अपने अंदर के कोने में मौन पड़ा रहने दूँ? अगर किसी राही को काँटा गड़ जाता है तो क्या वह काँटे को लिए दिए उसी तरह चलता है? मैं इसका क्या करूँ?

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  4. वही त्रिलोचन है

    वही त्रिलोचन है, वह—जिस के तन पर गंदेकपड़े हैं। कपड़े भी कैसे—फटे लटे हैं

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  5. उनका हो जाता हूँ

    चोट जभी लगती हैतभी हँस देता हूँ

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