पानी की आँखों में

त्रिभुवनत्रिभुवन

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बारिश की बूँदों में ये रेत जैसा क्या है?
तड़-तड़ गिरता,
कभी चिंतित लहरों पर दौड़ता,
कभी नाज़ुक पाँखों से उड़ता
पानी की आवाज़
इतनी भीगी-भीगी और भरभराई-सी क्यों है?
पानी की देह से झरती महक से
रेत की इंद्रियाँ इतनी विचलित-सी क्यों हैं?
पानी के चेहरे पर चाँद-जलैरी1 जैसा क्या है?
जीया-जूण2 में कलायण3-सा क्या ऊमटा हुआ है?
काल-विधूंस4 की आत्मा में
आज ये उदासी जैसा क्या है?
पानी के हिए5 में ये हिलोले6 से लेता क्या है?
पानी की आँखों में पानी जैसा क्या है?

त्रिभुवन
About the poet

त्रिभुवन

सुपरिचित कवि-लेखक और पत्रकार।

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