लौटते पत्र के साथ
कुछ बादल भेजना
समुद्र के कुछ पेड़
पत्तियों के बीच चहचहाते कुछ पक्षी
और पानी की कुछ लहरें भेजना
अपनी सुंदर आँखों के अक्स भेजना
भेजना चेहरे की लालिमा के कुछ लैंडस्केप
और रात भर नशा करके बैठी सुबह की कुछ छवियाँ भेजना
हाँ, एक खुली खिड़की भेजना
एक मदमाती पतली अकेली गली का वह कोना भेजना
जहाँ मैं तुमसे मिल सकूँ
और अपनी उँगलियों की छुअन भेजना
जिसे अपनी चाहत की दीवारों में गाड़कर
अपने भरोसे की गठरी टाँग दूँ!








