एक दिन एक लड़की मेरे दफ़्तर आई
और बोली : मेरी ख़बर छाप दो
उसने एक काग़ज़ आगे बढ़ाया,
जिस पर लिखा था :
राजा शिष्ट है, हृष्ट-पुष्ट है, पर दुष्ट है!
मैंने कहा, राजा सच्चा है
और अच्छा है।
वह बोली, तुम तो कहोगे ही।
वह आगे बोली : यह काम की बातों पर चुप्पी साध लेता है
और दिनों-महीनों-वर्षों व्यर्थ बोलता रहता है
यह वहाँ जाता ही नहीं, जहाँ इसे जाना ज़रूरी है
यह बस व्यर्थ घूमता रहता है।
मैंने कहा, इसमें छपने जैसी कोई बात नहीं है।
उसने कहा, यह उन लड़कों से भी बुरा है,
जो मुझे लड़की ओ लड़की कहकर चिढ़ाते हैं
और मेरी चीटिंग करके पास होते हैं।
मैंने कहा, यह भी छपने लायक़ बात है भला?
वह बोली : राजा ने कुआँ खोदा और हमें डुबो दिया
और हम डूबे हुए लोग हर रोज़ देखते हैं
यह कुओं के भीतर कुएँ खोदे जा रहा है।
मैंने कहा, यह भी कहाँ छपने जैसी बात है!
वह लड़की बोली : देखो-देखो, यह अख़बार छूकर देखो।
मैंने अख़बार छुआ तो मेरे हाथ कालिख से भरे थे
और लड़की कह रही थी : इस राजा की ख़बर कौन छापे
आप लोग तो इस देश के लोगों की तरह नींद में हँस रहे हैं।








