सवाल-अंदर-सवाल ले कर कहाँ चले हो

सरवत ज़ेहरासरवत ज़ेहरा5 May 1972

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सवाल-अंदर-सवाल ले कर कहाँ चले हो

ये आसमान-ए-मलाल ले कर कहाँ चले हो

जुनूँ के रस्ते में ये ख़ुदी भी अज़ाब होगी

ख़िरद का कोह-ए-वबाल ले कर कहाँ चले हो

कहाँ पे खोलोगे दर्द अपना किसे कहोगे

कहीं छुपाओ, ये हाल ले कर कहाँ चले हो

नहा रहे हो अज़ाब-ए-हिज्राँ की बारिशों में

ज़रा सी गर्द-ए-विसाल ले कर कहाँ चले हो

सराब पीने की आरज़ू है तो जवाब दे दो

सफ़र में ख़्वाब-ओ-ख़याल ले कर कहाँ चले हो

चले हो जब तो हमारे मौसम बदल चुके हैं

सुनो ये मेरे वबाल ले कर कहाँ चले हो

सरवत ज़ेहरा
About the poet

सरवत ज़ेहरा

मूल नाम : सरवत ज़ेहरा जन्म : 05 May 1972 | कराची, सिंध

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