फाँस लेती है दिल समझ लेंगे

पंडित दया शंकर नसीम लखनवीपंडित दया शंकर नसीम लखनवी

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फाँस लेती है दिल समझ लेंगे

ज़ुल्फ़ करती है बल समझ लेंगे

हम सिपाही हैं ओ कमान अबरू

तेग़ पकड़े अजल समझ लेंगे

निय्यत-ए-शब हराम ऐ साक़ी

आज तो सोएँ कल समझ लेंगे

आज बे-मिस्ल हो सुख़न में 'नसीम'

चार दिन में मसल समझ लेंगे

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
About the poet

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी

उपनाम : 'नसीम' मूल नाम : पंडित दया शंकर कोल जन्म : लखनऊ, उत्तर प्रदेश निधन : लखनऊ, उत्तर प्रदेश पंडित दया शंकर नसीम 1811 ई. में लखनऊ में पैदा हुए थे। उनका सम्बंध पंडितों के संभ्रांत और शिक्षित परिवार से था इसलिए उनको भी साहित्य से बेहद दिलचस्पी थी। ज़रूरी शिक्…

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