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Poetry & Stories
इतिहास नही हैं ये - नीरजा हेमेन्द्र
सुनसान पड़ा विस्तृत मैदानतपिश में झुलस उठीं नन्ही दूब
वर्तमान - नीरजा हेमेन्द्र
मैं नही मान सकती किकंक्रीट के जंगलों में
साँझ और गौरैया - नीरजा हेमेन्द्र
मेरे घर के आँगन मेंअमरूद के वृक्ष़ पर बैठी गौरैया
साए में धूप - नीरजा हेमेन्द्र
मैं थी नन्ही बच्चीमाँ! तुम कहती थी परी
बेसुध है आदमी - नीरजा हेमेन्द्र
आँधी बयार में, बेसुध है आदमी,तूफानी मझधार में, बेसुध है आदमी।
नीरजा हेमेन्द्र: Quick Answers
When was नीरजा हेमेन्द्र born?
नीरजा हेमेन्द्र was born on 24 September 1968. Associated place: कुशीनगर, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश.
Where can I read नीरजा हेमेन्द्र's poetry?
Kavishala has 92 poems and stories by नीरजा हेमेन्द्र, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by नीरजा हेमेन्द्र
इतिहास नही हैं ये - नीरजा हेमेन्द्र
सुनसान पड़ा विस्तृत मैदानतपिश में झुलस उठीं नन्ही दूब
वर्तमान - नीरजा हेमेन्द्र
मैं नही मान सकती किकंक्रीट के जंगलों में
साँझ और गौरैया - नीरजा हेमेन्द्र
मेरे घर के आँगन मेंअमरूद के वृक्ष़ पर बैठी गौरैया
साए में धूप - नीरजा हेमेन्द्र
मैं थी नन्ही बच्चीमाँ! तुम कहती थी परी
बेसुध है आदमी - नीरजा हेमेन्द्र
आँधी बयार में, बेसुध है आदमी,तूफानी मझधार में, बेसुध है आदमी।
खिल गई है चम्पा - नीरजा हेमेन्द्र
परबतों से आती है, मलय समीर,चंचल मन मौसम संग उड़-उड़ जाता है।
चम्पा-सी देह - नीरजा हेमेन्द्र
उस पथ पर मैंपुनः चलने लगी हूँ
वह मजदूर - नीरजा हेमेन्द्र
दूर-दूर तक फैले हुएगन्ने के खेत
उसका पसीना - नीरजा हेमेन्द्र
दूर-दूर तक फैले हुएगन्ने के खेत
वो - नीरजा हेमेन्द्र
गेहूँ की सुनहरी बालियों कोलगातार पीट-पीट कर
प्रतीक्षा - नीरजा हेमेन्द्र
अँधेरे मेंटटोलते-टटोलते मेरा हाथ
नदी की कराह - नीरजा हेमेन्द्र
ज़िन्दगी रोज़ यूं हीवक्त की नदी में
Selected Quotes by नीरजा हेमेन्द्र (चुनिंदा उद्धरण)
मेरे घर के आँगन मेंअमरूद के वृक्ष़ पर बैठी गौरैयासुनसान पड़ा विस्तृत मैदानतपिश में झुलस उठीं नन्ही दूबमैं थी नन्ही बच्चीमाँ! तुम कहती थी परीदूर-दूर तक फैले हुएगन्ने के खेतगेहूँ की सुनहरी बालियों कोलगातार पीट-पीट करमैं नही मान सकती किकंक्रीट के जंगलों मेंVideos on नीरजा हेमेन्द्र
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