नींद के बारे में

लवली गोस्वामीलवली गोस्वामी

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वह मुझसे पहले सोने जाता और मुझसे पहले जागता था

मैं अक्सर लिखते-लिखते सिर उठा कर कहती तुम सो जाओ

मैं बाद में आकर तुम्हारे पास सो जाऊँगी

मैं उसके साथ सोती थी

जैसे दरारों में देह को दरार का ही आकार दिए जोंक सोती है

संकीर्ण दुछत्तियों में थक कर चंचल बिल्लियाँ सोती है

धरती की देह पर शिराओं का-सा आकार लिए नदियाँ सोती हैं

नाल काटे जाने के ठीक बाद नाक से साँस लेने का अभ्यास करता शिशु सोता है

जैसे धरती आकाश के बीच लटके मायालोक में त्रिशंकु सोता होगा

सोने की क्रिया

हमेशा मेरे लिए एक प्रकार की निरीहता रही

पराजय रही

जागना एक सक्रियता

एक आरोहण

वह ताउम्र मुझसे कहता रहा :

कभी सोया भी करो, सोना बुरी बात नहीं है

मैं इस अच्छी बात को रोज़ उसके चेहरे पर होता देखने के लिए जागती रही

मैं कहती रही किसी को सोते देखना सुख देता है

वह समझदार मेरी इस समझ को नासमझी कहकर

मुझे सुलाने की कोशिश करता रहा

वैसे तो सोया हुआ आप रात को तालाब के जल को भी कह सकते हैं

पर उसके भीतर आसमान गतिमान रहता है

सब तारे उस पर झुक-झुक कर अपना चेहरा देखते हैं

मैं भी उसे सोते हुए मुस्कुराते देखकर

उसकी आत्मा में अपनी उपस्थिति देखती थी

मेरे अंतस में वह ऊर्जा के केंद्र के जैसा ही था

पृथ्वी के कोर में पिघले खनिज की तरह

महावराह की तरह जब वह जल के सीमाहीन विस्तार पर

मुझे हर जगह तलाश रहा था

मैं उसके अंतस में जलप्लावित पृथ्वी-सी समाधिस्थ थी

आप कह सकते हैं वह दिपदिपाता गतिमान मेरे अंदर सो रहा था

मैं अनवरत घूमती दिन-रात के चक्कर काटती उसके अंदर जाग रही थी

अगर देह ब्रह्मांड है तो प्रत्येक नींद प्रलय है

जो स्वप्न अगली सुबह स्मृति में शेष रह जाते हैं

वे नूह की नौका में बचे जीवित पशु-पक्षी हैं

यही स्मृतियाँ हमें आने वाले कल्प से दिन में

जीने के लिए माक़ूल कोलाहल बख़्शती है

पलकें नियामत हैं

(आप परदे भी पढ़ें तो चलेगा)

वरना ज़रा सोचिए कैसा लगता होगा

जब नींद में मगरमच्छ को आते देखकर भी मछलियों की नींद नहीं टूटती होगी

वह अंतिम भयानक सपना तो याद होगा आपको

जिसने आपको न जाग पाने की विवशता का परिचय दिया होगा

वही आपके मन के सबसे अँधेरे कोने में छिपे डर का सपना

जो नुकीले दातों से आपको कुतर देता है पर आपकी नींद नहीं खुलती

नींद आश्वस्ति है

जागना अविश्वास है

तो बताइए आप मछलियों को क्या देना चाहेंगे

आश्वस्ति या अविश्वास?

मछलियाँ खुली आँखों से सच्ची निरीह नींद सोती हैं

बगुले सोने का अभिनय करके झपट कर शिकार पकड़ते हैं

दुनिया के तमाम घोड़े खड़े-खड़े सोते हैं

जबकि उल्लू दिन की रौशनी को अनदेखा करके सोते हैं

सोना क़तई सामान्य प्रक्रिया भर नहीं है

एक चुनी हुई आदत है

उससे भी बढ़कर एक साधा हुआ अभ्यास है।

लवली गोस्वामी
About the poet

लवली गोस्वामी

नई पीढ़ी की कवयित्री। ‘प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता’ शीर्षक पुस्तक उल्लेखनीय। जन्म : धनबाद, झारखंड लवली गोस्वामी का जन्म 5 जनवरी 1987 को हुआ। वह मूलतः दर्शन और मिथक शास्त्र की स्वतंत्र टिप्पणीकार एवं कवयित्री हैं। कुछ वर्ष पूर्व प्रकाशित उनकी पुस्तक '…

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