हमारे समय में

लवली गोस्वामीलवली गोस्वामी

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हहराती अनियंत्रित जंगल की आग कहती है

कि वह दीए की प्रतिनिधि है

गाँव उजाड़ती बाढ़ ने मासूमियत से कह दिया

उसे सूखे खेतों पर तरस आ गया था

नालियाँ इठलाती हुई बहती हैं

ख़ुद को गंगा-जमुना की सहोदर बताती हैं

कुछ मगरमच्छ रो पड़े

लोगों ने समुद्र के पानी पर लाँछन लगा दिया

कुछ बिल्लियों के भाग से छींका टूटा

तो अधिकतर मेहनत छोड़कर भाग्य बँचवाने निकल पड़े

हमारे समय में

श्रेष्ठ कलाओं की तरह श्रेष्ठ स्त्रियाँ इसलिए प्रचलन से बाहर हैं

क्योंकि उन्हें समय देकर आत्मसात करना पड़ता है

हमारे समय में

कुछ शब्द हैं, जो हड़बड़ी में अर्थ छोड़कर वाक्य में चले आए हैं

कुछ परिभाषाएँ हैं जो अपने शब्द छोड़कर दौड़ पड़ी हैं।

लवली गोस्वामी
About the poet

लवली गोस्वामी

नई पीढ़ी की कवयित्री। ‘प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता’ शीर्षक पुस्तक उल्लेखनीय। जन्म : धनबाद, झारखंड लवली गोस्वामी का जन्म 5 जनवरी 1987 को हुआ। वह मूलतः दर्शन और मिथक शास्त्र की स्वतंत्र टिप्पणीकार एवं कवयित्री हैं। कुछ वर्ष पूर्व प्रकाशित उनकी पुस्तक '…

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