एक दिन मुझे एक अदम्य जिज्ञासु
तार्किक आदमी मिला
वह हर बीज को फोड़कर देख रहा था
कि उसके अंदर क्या है?
मैं उसे अंत तक समझा नहीं पाई
कि बीज के अंदर पेड़ होते हैं।
एक दिन मुझे एक अदम्य जिज्ञासु
तार्किक आदमी मिला
वह हर बीज को फोड़कर देख रहा था
कि उसके अंदर क्या है?
मैं उसे अंत तक समझा नहीं पाई
कि बीज के अंदर पेड़ होते हैं।

नई पीढ़ी की कवयित्री। ‘प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता’ शीर्षक पुस्तक उल्लेखनीय। जन्म : धनबाद, झारखंड लवली गोस्वामी का जन्म 5 जनवरी 1987 को हुआ। वह मूलतः दर्शन और मिथक शास्त्र की स्वतंत्र टिप्पणीकार एवं कवयित्री हैं। कुछ वर्ष पूर्व प्रकाशित उनकी पुस्तक '…
View profile & all 24 Poems / Storiesमुझे थोड़ा-थोड़ा सब चाहते थेज़रूरत के हिसाब से कम-बेशी
कविता का एक सच सुनोजब सब तेज़-तर्रार चौकन्ने झूठ सोते हैं
हहराती अनियंत्रित जंगल की आग कहती हैकि वह दीए की प्रतिनिधि है
वांछित का अभाव सारांश होता है स्मृतियों की किताब कातमाम स्मृतियाँ 'विदा' के एक अकेले शब्द की वसीयत होती हैं
तुम्हारे ऊपर सोकर तुम्हें चूमने से पहलेमैं अपनी नाक की नोक से तुम्हारी नाक की नोक दबाती हूँ