एक
सिर्फ़
मनुष्यों की ही नहीं,
यह वृक्षों की भी
सामूहिक हत्या का दौर है!
दो
इन दिनों मेरी चिंता में शामिल है
संसार भर के ताबूतों में
लगी लकड़ियाँ
जिनकी चिकनाहट में
अनगिन वृक्षों की शाखाएँ
अपने करोड़ों घोंसलों के साथ
दफ़्न हो रही हैं
मुस्कुराते हुए!
तीन
इन दिनों मेरी चिंता में शामिल हैं
वे वृक्ष भी
जिनकी शाखाएँ कभी एक साथ
जल नहीं सकीं
अलग-थलग रहीं
एक अदने-से शरीर के वास्ते
श्मशान घाट पर
विलाप करते हुए!








