उपाय

हरप्रसाद दासहरप्रसाद दास

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ख़ून देख डर मत जाना।

बलि के मांस का है यह

तुम्हारा हिस्सा, लो

पकाओ ख़ुद खाओ

बच्चों को खिलाओ

जाओ!

परंपरा भोगने का

यह भी है एक उपाय :

मैं कितना निर्भय

देखा!

कल रात

सपनों से हाथापाई में

शायद ख़ून का

एक क़तरा

छू गया है

हरसिंगार के गालों को।

हरप्रसाद दास
About the poet

हरप्रसाद दास

ओड़िया भाषा के सुपरिचित कवि-निबंधकार-स्तंभकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

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