अयोग्यता

हरप्रसाद दासहरप्रसाद दास

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तुम तो जानते हो मेरी अयोग्यता

कहीं कुछ मिल भी गया हो तो

सहेज कर रख नहीं पाता मैं अंत तक

तुम्हें फिर कैसे रख पाता कैसे

ध्रुवत्व की कल्पना में?

ध्रुवत्व यानी धनुष में

शर संयोजन की अप्रमेयता,

ध्रुवत्व यानी लक्ष्य और ज़रूरत

दोनों की भयावह विशालता

बस इसी कल्पना में

बीत गया जीवन

समझा न सका

अंजुली भर पानी के

मूक आदर्श में

बिम्ब होने की यथार्थता,

फिर भी है विश्वास

अयोग्यता में—

कुछ न पा

सब कुछ पाने की

विडम्बना भरी चतुराई में।

हरप्रसाद दास
About the poet

हरप्रसाद दास

ओड़िया भाषा के सुपरिचित कवि-निबंधकार-स्तंभकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

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